रानी, एक शक्तिशाली शेरनी, अपने जंगल में गर्व से घूम रही थी। उसके साथ उसके मित्र गिलहरी और चिता भी थे। वे तीनों जंगल की सुरक्षा और सुख-शांति की चर्चा कर रहे थे।
"रानी, मुझे लगता है कि जंगल में कुछ अजीब हो रहा है," गिलहरी ने चिंतित स्वर में कहा। चिता ने अपनी तेज दृष्टि से देखा कि एक शिकारी जंगल के अंदर प्रवेश कर चुका था।
"हमें मिलकर कुछ करना होगा," रानी ने दृढ़ता से कहा। उन्होंने एक योजना बनाई कि कैसे शिकारी को जंगल से बाहर खदेड़ना है। "मैं अपनी गति से उसे भ्रमित करूँगा," चिता ने कहा।
चिता ने अपनी गति से शिकारी को जंगल में घुमाया, जबकि रानी और गिलहरी ने उसे एक दलदल की ओर ले जाने की योजना बनाई। शिकारी फँस गया और घबराकर मदद के लिए चिल्लाया।
रानी शिकारी के सामने खड़ी हो गई। "तुम्हें जंगल में फिर कभी नहीं आना चाहिए," उसने चेतावनी दी। शिकारी ने माफी मांगी और अपने जीवन की कसम खाई कि वह फिर कभी जंगल में नहीं आएगा।
शिकारी के जाने के बाद, रानी ने जंगल के सभी जानवरों की एक सभा बुलाई। "हमें अपनी सुरक्षा के लिए नए उपायों की आवश्यकता है," चिता ने प्रस्ताव दिया। सभी ने मिलकर जंगल की सुरक्षा के लिए नए नियम बनाए और खुशी से सभा समाप्त की।
