राहुल ने हवेली के सामने खड़े होकर उसके विशाल आकार को देखा। उसका दिल जिज्ञासा और भय के साथ धड़क रहा था। हवेली की खिड़कियों से झांकता अंधेरा मानो उसे बुला रहा था। रात की ठंडी हवा उसके चेहरे पर लगी, उसके अंदर एक अद्भुत रोमांच पैदा हुआ।
राहुल ने धीरे से दरवाजा खोला और अंदर कदम रखा। हर कदम के साथ लकड़ी की फर्श चीख उठी, मानो किसी पुराने संगीत की धुन बज रही हो। चारों ओर धूल भरी छतें और जाले लटके हुए थे। अचानक, उसे एक हल्की सी आवाज़ सुनाई दी, मानो कोई गुनगुना रहा हो।
उसने एक कमरे में प्रवेश किया और देखा कि दीवार पर एक महिला की धुंधली तस्वीर टंगी थी। तस्वीर की आंखें उसकी ओर घूर रही थीं, जैसे वे उसकी आत्मा को पढ़ रही हों। "ये कौन होगी?" उसने धीरे से खुद से कहा।
राहुल ने महसूस किया कि कमरा अचानक ठंडा हो गया है। उसकी पीठ के पीछे एक हलचल हुई, मानो परछाइयाँ जीवित हो उठी हों। एक भयानक चीख हवा में गूंजी, और राहुल का दिल बैठ गया। वह पीछे मुड़ा और देखा कि वह महिला उसकी ओर बढ़ रही है, उसके चेहरे पर एक खतरनाक मुस्कान थी।
राहुल ने अपने डर पर काबू पाने की कोशिश की और भागने लगा। हवेली के अंधेरे गलियारे उसके पीछे दौड़ने लगे। उसकी सांसें तेज हो गईं, और दिल की धड़कनें जोर से सुनाई देने लगीं। "क्या ये मेरी आखिरी रात होगी?" उसने सोचा, अपने दिल की धड़कन को शांत करने की कोशिश करते हुए।
अगली सुबह, जब सूरज की किरणें हवेली पर पड़ीं, राहुल को बेहोश पाया गया। स्थानीय लोग उसके चारों ओर इकट्ठा हो गए। उसके होश में आते ही, वह सिर्फ एक ही बात कहता रहा, "वो...वो आ रही है..." हवेली के रहस्य और भी गहरे हो गए, और लोग अब वहाँ जाने से और भी ज्यादा डरने लगे।
















