एक ऊँचे पेड़ की सबसे ऊंची शाखा पर कौवा बैठा था। उसके काले पंख सूरज की रोशनी में चमक रहे थे। "यह रोटी का टुकड़ा मेरे लिए एक अच्छी सुबह का नाश्ता होगा," उसने सोचा। नीचे खड़ी लोमड़ी की नजर उस पर पड़ी, उसकी आँखों में चालाकी की चमक थी।
"कौवा भाई, तुम कितने सुंदर और बुद्धिमान हो," लोमड़ी ने कहा। "मैंने सुना है कि तुम्हारी आवाज पूरी जंगल में सबसे मधुर है। क्या तुम मुझे एक गीत नहीं सुनाओगे?"
कौवा थोड़ा झिझका, लेकिन फिर उसने सोचा कि उसकी आवाज़ की तारीफ सुनकर अच्छा लगेगा। उसने अपनी चोंच खोली और कांव-कांव करना शुरू कर दिया। जैसे ही उसने गाना शुरू किया, रोटी का टुकड़ा उसके मुँह से गिर गया।
"धन्यवाद, कौवा भाई, यह रोटी बहुत स्वादिष्ट लगेगी," लोमड़ी ने हंसते हुए कहा और झाड़ियों में गायब हो गई।
"मैंने कितनी बड़ी गलती कर दी," उसने खुद से कहा। "मुझे चापलूसी करने वालों से सावधान रहना चाहिए था।" वह अब समझ गया था कि उसकी मूर्खता के कारण वह अपना नाश्ता खो बैठा था।
यह कहानी हमें सिखाती है कि चापलूसी करने वालों से सावधान रहना चाहिए। कौवा ने एक महत्वपूर्ण सबक सीखा था, और वह अब भविष्य में अधिक सतर्क रहने का संकल्प कर चुका था।
















