एक गाँव में एक चालाक चूहा रहता था। वह हमेशा होशियार रहता और बिल्ली से बचने के तरीके खोजता। गाँव में एक बड़ी और डरावनी बिल्ली भी थी, जो सभी चूहों को पकड़कर खा जाना चाहती थी।
चालाक चूहा ने सोचा, "अगर मैं बिल्ली से बचना चाहता हूँ, तो मुझे कुछ नया उपाय सोचना होगा।" उसने अपने दोस्तों से कहा कि अगर वे बिल्ली के गले में घंटी बाँध दें, तो वे अलर्ट हो सकते हैं।
सभी चूहे बहुत खुश हुए और इस योजना की तारीफ करने लगे। लेकिन तभी एक बूढ़ा चूहा बोला, "यह योजना तो बहुत अच्छी है, लेकिन यह घंटी बिल्ली के गले में बाँधेगा कौन?"
यह सुनकर सभी चूहे चुप हो गए। वे समझ गए कि केवल योजना बनाना ही काफी नहीं, उसे पूरा करना भी जरूरी है। चारों ओर सन्नाटा छा गया, और सभी चूहों ने एक-दूसरे की ओर देखा।
इस तरह, चूहे बिल्ली से सावधान रहने लगे और पहले से ज़्यादा सतर्क हो गए। उन्होंने समझ लिया कि खतरे से निपटने के लिए सतर्कता और साहस दोनों की आवश्यकता होती है।
















