बंदर और गिलहरी एक घने जंगल में रहते थे, जहाँ हर तरफ हरियाली और जीवन की हलचल थी। वे दोनों सबसे अच्छे दोस्त थे, हमेशा एक-दूसरे का साथ देते और खुश रहते।
उस दिन, बंदर को एक नई अखरोट मिली, जो धूप में चमक रही थी। वह खुश होकर उसे लेकर अपने घर की ओर दौड़ा।
बंदर ने अखरोट को खोलते ही निराशा से देखा कि उसमें एक कीड़ा था। उसे लगा कि अब यह अखरोट खराब हो गया है और खाया नहीं जा सकता।
गिलहरी ने देखा कि बंदर ने अखरोट को फेंक दिया और पूछा, "क्या हुआ, बंदर? क्या अखरोट खराब है?"
बंदर ने उसे बताया कि अखरोट में कीड़ा था। गिलहरी ने हंसते हुए कहा, "बंदर, तुम बहुत मूर्ख हो! कीड़ा तो बहुत छोटा है। तुम बस अखरोट को काटकर उस हिस्से को खा सकते हो जिसमें कीड़ा नहीं है।"
बंदर ने गिलहरी की सलाह मानी और अखरोट को काटकर उस हिस्से को खा लिया जिसमें कीड़ा नहीं था। वह बहुत खुश हुआ कि उसने अखरोट को बर्बाद नहीं किया। दोनों दोस्त हंसी-मजाक करते हुए जंगल में घूमने चले गए।
















