शेर जंगल का राजा था और अपनी ताकत से सभी जानवरों को भयभीत रखता था। वहीं भालू एक शांत और सरल स्वभाव का जानवर था, जो अपनी जिंदगी में खुश रहता था।
शेर ने एक भालू को देखा जो आराम से अपनी दिनचर्या में व्यस्त था। "यह भालू आसानी से मेरे खाने का शिकार बन सकता है," उसने सोचा।
"भालू भाई, तुम अच्छे स्वास्थ्य में लग रहे हो। मैं तुम्हें अपना शिकार बना सकता हूं," शेर ने कहा।
"तुम मेरी मदद कर सकते हो, शेर भाई। अगर तुम मुझे मारोगे तो तुम्हारे पास कोई दोस्त नहीं रहेगा।" भालू ने डरते हुए कहा।
"ठीक है, तुम क्या प्रस्ताव रखते हो?" शेर ने पूछा।
"हम दोनों मिलकर शिकार करें और उसे बराबरी से बांट लें। इस तरह, मैं भी तुम्हारे साथ शिकार करूंगा और तुम्हें भी भूखा नहीं रहना पड़ेगा," भालू ने सुझाव दिया।
शेर ने भालू की बात मान ली। दोनों मिलकर शिकार करने गए और शिकार पकड़ा।
शेर और भालू ने शिकार को मिलकर खाया और खुश हो गए। "बल का साथ समझदारी से देना चाहिए," शेर ने सोचा, "कभी-कभी ताकतवर होने के बावजूद दूसरों की मदद की आवश्यकता होती है।"
















