मोर अपने नीले-हरे पंखों को फैलाकर, एक बड़ी चट्टान के ऊपर बैठा है। उसके पंखों पर सूरज की किरणें पड़ते ही वे और भी चमक उठते हैं। दूर झील के किनारे मोरनी घास में कुछ ढूँढ रही है, उसकी आँखों में सादगी और चेहरे पर शांति है।
"क्या तुमने कभी देखा है कि मेरा नृत्य पूरे जंगल को खिलखिला देता है?"
"सौंदर्य केवल रंग-रूप में नहीं, मन की अच्छाई में भी है," मोरनी मुस्कुराकर बोलती है।
सभी जानवरों के चेहरों पर चिंता की लकीरें हैं। पेड़ की छाँव में बैठी मोरनी मोर की ओर देखती है, जो अब अपनी सुंदरता के बजाय जंगल की हालत पर उदास है।
"हमें कुछ करना होगा, वरना सब सूख जाएगा," मोरनी की आवाज़ में चिंता झलकती है।
"शायद मेरा नृत्य इंद्र देव को प्रसन्न कर सकता है," मोर उम्मीद से कहता है।
मोरनी सब जानवरों को एकत्र करती है—खरगोश, हिरन, हाथी और बंदर सभी मोर के इर्द-गिर्द गोल घेरा बनाकर खड़े हो जाते हैं।
"आइए, हम सब मिलकर इंद्र देव से वर्षा की प्रार्थना करें,"
हाथी अपने बड़े कान हिलाते हुए बोलता है, "अगर हम सब एक साथ कोशिश करें तो शायद चमत्कार हो जाए!"
मोर[/@ch_1] अपने पंख फैलाकर नृत्य शुरू करता है, उसकी चाल में आत्मविश्वास और विनम्रता दोनों है। आसमान में बादल धीरे-धीरे घिरने लगते हैं, बाकी जानवर आँखें बंद कर प्रार्थना करते हैं।]
मोर के पंखों की झिलमिलाहट और उसके नृत्य की लय से वातावरण में ऊर्जा भर जाती है। मोरनी की आँखों में आंसू हैं, पर वह मुस्कुरा रही है, क्योंकि उसे विश्वास है।
"हे इंद्र देव, हमारे जंगल को फिर से हरा-भरा कर दो,"
सभी जानवर एक सुर में प्रार्थना करते हैं, उनकी आवाज़ आसमान तक पहुँचती है।
"देखो, बारिश आ गई!" मोरनी खुशी से चिल्लाती है।
"सचमुच, जब हम सब एक साथ होते हैं तो असंभव भी संभव हो जाता है," मोर गर्व से कहता है।
हाथी अपनी सूँड़ में पानी भरकर सब पर छिड़कता है, सभी खिलखिलाकर हँसते हैं।
मोरनी बच्चों को घेरकर बैठाती है और कहती है, "याद रखो, एकता और विनम्रता से बड़ी से बड़ी समस्या हल हो सकती है। सच्ची सुंदरता दूसरों की भलाई में है।"
मोर भी सिर झुकाकर मुस्कुराता है, और उसके पंखों में इंद्रधनुष की छटा झलकती है। जंगल में अब फिर से संगीत, हरियाली और खुशियों की बारिश है।
















