Brewing the Unknown

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    गजो हाथी और चश्मे वाला बंदर नीलगिरी के जंगलों में 'गजो' नाम का एक हाथी रहता था। गजो को अपनी शानो-शौकत बहुत पसंद थी। एक दिन उसे कहीं से एक पुराना, बड़ा सा पीला चश्मा मिल गया। गजो ने वह चश्मा अपनी आँखों पर चढ़ा लिया और पूरे जंगल में ऐसे घूमने लगा जैसे वह कोई बॉलीवुड स्टार हो। वहीं पेड़ पर बैठा 'चीकू' बंदर यह सब देख रहा था। चीकू बहुत ही शरारती था। उसने सोचा, "आज तो गजो मामा की फिरकी लेनी पड़ेगी!" चीकू नीचे उतरा और गजो के सामने हाथ जोड़कर खड़ा हो गया। चीकू: "अरे गजो भाई! क्या कमाल लग रहे हो। पर आपको पता है? इस चश्मे में एक जादू है।" गजो ने अपनी सूंड हवा में लहराई और पूछा, "कैसा जादू, छोटे?" चीकू: "भाई, जो भी इस चश्मे को पहनता है, उसे छोटी चीजें बहुत बड़ी दिखने लगती हैं। अब देखो, मैं तो छोटा हूँ, पर शायद आपको मैं डायनासोर जैसा दिख रहा होऊँगा?" गजो ने चश्मे के पीछे से अपनी आँखें सिकोड़ीं और बोला, "हाँ... लग तो तू कुछ भारी-भरकम रहा है।" चीकू ने मौका देखा और तुरंत पास पड़ी एक छोटी सी सूखी लकड़ी उठाई और बोला, "गजो भाई, यह देखो! यह असल में एक बहुत बड़ा अजगर है, पर चश्मे की वजह से आपको सिर्फ लकड़ी जैसा दिख रहा है। संभल के!" गजो डर के मारे पीछे हट गया, "क्या? अजगर?" तभी चीकू ने एक और चाल चली। उसने एक छोटा सा कंकड़ गजो के पैर के पास फेंका और चिल्लाया, "भागो गजो भाई! आसमान से पहाड़ गिर रहा है!" गजो हाथी ने आव देखा न ताव, अपनी भारी देह लेकर जंगल में सरपट दौड़ने लगा। "बचाओ! पहाड़ गिर रहा है! अजगर आ गया!" वह चिल्लाता रहा और रास्ते में झाड़ियों और कीचड़ में गिरता-पड़ता रहा। पूरा जंगल यह देखकर लोट-पोट हो गया कि एक नन्हा सा बंदर इतने बड़े हाथी को डरा रहा है। आखिर में गजो का चश्मा एक झाड़ी में फंसकर उतर गया। जैसे ही चश्मा उतरा, उसे सब कुछ सामान्य दिखने लगा। न कोई अजगर था, न गिरता हुआ पहाड़। तभी पेड़ के ऊपर से चीकू की हंसी सुनाई दी, "गजो भाई! चश्मा तो जादू का नहीं था, पर आपका डर ज़रूर असली था!" गजो को अपनी गलती समझ आ गई। उसने अपनी सूंड से चीकू पर थोड़ा पानी छिड़का और हंसते हुए बोला, "अगली बार चश्मा नहीं, दिमाग लगाकर आऊंगा!" उस दिन के बाद से गजो ने 'स्वैग' दिखाना थोड़ा कम कर दिया और चीकू ने नई शरारत की प्लानिंग शुरू कर दी। | Story.com