जंगल के बीचों-बीच, राहुल खड़ा था। उसके चेहरे पर चिंता की गहरी लकीरें साफ नज़र आ रही थीं। अनामिका, उसकी बहन, उसके बगल में खड़ी थी, आँखों में डर की झलक लिए।
"हमें इस जगह से जल्दी निकलना होगा," राहुल ने धीरे से कहा।
"लेकिन हम यहाँ क्यों आए थे?" अनामिका ने अप्रसन्नता से पूछा।
एक रहस्यमय अजनबी वहां खड़ा था। उसने एक काले रंग का कोट पहना हुआ था और उसकी आँखें गहरी और भयावह थीं।
"यहाँ कुछ ऐसा है जिसे तुम समझ नहीं सकते," उसने गंभीरता से कहा।
"तुम कौन हो?" राहुल ने पूछा।
"मैं इस जंगल का रक्षक हूँ," अजनबी ने जवाब दिया।
अनामिका को महसूस हुआ कि उसके पैर जमीन से उठ रहे हैं। राहुल ने उसे कस कर पकड़ लिया, लेकिन वह खुद को भी संतुलित नहीं कर पा रहा था।
"हमें यहाँ से बाहर निकालो!" अनामिका ने चिल्लाया।
"तुम्हें अपनी आस्था पर विश्वास करना होगा," अजनबी ने कहा।
राहुल और अनामिका ने देखा कि वे जंगल के एक खुली जगह पर खड़े हैं। अजनबी गायब हो चुका था, लेकिन उसने जो कहा था, उसका अर्थ अब स्पष्ट हो चुका था।
"हमारी आस्था ने हमें बचा लिया," राहुल ने मुस्कुराते हुए कहा।
"हाँ, और हमें भविष्य में भी इसे नहीं भूलना चाहिए," अनामिका ने सहमति में कहा।
















