माधव अपने छोटे से कच्चे घर के बाहर खड़ा था, जब आसमान में काले बादल उसके सिर पर मंडरा रहे थे। उसकी दुबली-पतली और मौसम की मार झेली हुई काया चिंताग्रस्त लग रही थी क्योंकि हवा की गूँज सुनाई दे रही थी। "हे प्रभु, मेरी रक्षा करना।"
तूफान ने गाँव में भारी तबाही मचाई। माधव का घर भी इस विनाश से अछूता नहीं रहा और पूरी तरह से गिर गया। "अब मैं कहाँ जाऊँ?" उसने निराशा में कहा।
माधव ने हनुमान जी के मंदिर में शरण ली। उसने अपने हाथ जोड़कर प्रार्थना की और आँखों से आँसू बहते रहे। "हे पवनसुत, मेरे सब कुछ उजड़ गया है। अब सिर्फ आपका सहारा है।"
गहरी नींद में माधव ने एक स्वप्न देखा, जहाँ एक विशाल और शक्तिशाली वानर, हनुमान जी, उसके सामने प्रकट हुए। "भक्त, चिंता मत करो। मैं कल तुम्हारे दुखों का निवारण करूंगा।"
सुबह होते ही माधव ने देखा कि गाँव में लोग इकट्ठा हो रहे थे। रात को एक अद्भुत घटना हुई थी। हनुमान जी ने तूफान से गिरे मलबे को हटाकर माधव के लिए नया घर बना दिया था। "यह प्रभु की कृपा है!" उसने भावुक होकर कहा।
इस घटना के बाद गाँव के लोग हनुमान जी की भक्ति में डूब गए। उन्होंने वहाँ एक भव्य मंदिर बनवाया, जिसे “भक्त वत्सल हनुमान मंदिर” कहा गया। "यह हमारे विश्वास की विजय है," माधव ने गर्व से कहा, जब गाँव वालों ने उसे सम्मानित किया।
















